अमेरिकी सहायता से आतंकवाद पौषित करता है पाकिस्तान

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अफगानिस्तान का एक बडा वर्ग विश्व स्तर पर अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कटौती की मांग करा रहा है । अमेरिका में अपना विरोध जताने के लिए दर्जनों अफगान छात्रों के साथ मिलकर अनेक लोगों ने अमेरिकी कांग्रेस से पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता राशी में कटौती की मांग की है । यह विरोध प्रदर्शन 7 दिसंबर को अमेरिका की राजधानी में किया गया ।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका 70 के दशक से पाकिस्तान और अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग सोवियत संघ के विरुद्ध करता रहा है । उस समय सोवियत-अफगान युद्ध (1979-1989) के दौरान, पाकिस्तान की जमीन को अमेरिका ने सोवियत संघ के विरुद्ध योजनाओं के निर्माण, हमलों को अंजाम देने तथा मुजाहिदीन गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने के लिए किया था । अमेरिका अपने हितों की पूर्ती के लिए पाकिस्तान की जमीन का उपयोग करता चला आ रहा है । isi-afgansइस दोनों ही देशों के हित आज भी आतंकवाद से जुडे रहे हैं किसी को अपने हथियारों के खरीदार चाहिए,  तो किसी को आर्थिक सहायता । यही वजह है कि आतंकवाद की समाप्ति से दोनों ही देशों को नुक्सान होगा । यही नही विश्व के अनेक हिस्सों में विद्रोहों के तार भी इस सब से जुडे हुए हैं ।  सोवियत संघ के विरुद्ध युद्ध लड़ने में अमेरिका को सहायता देने का ईनाम पाकिस्तान को आज तक मिल रहा है । यही वजह है कि अमेरीका कभी भारत का साथ नही देता ।

आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध के नाम पर पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद का पौषण ही कर रहा है, क्योंकि जब तक आतंकवाद रहेगा तभी तक उसे आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध के धन मिलेगा । कुछ शोधपत्रों में छपे लेखों से मिली जानकारी भी “आईएसआई” को सवालों को घेरे में खडा करती है । आई. एस. आई.  एक दशक से हक्कानी नेटवर्क और तालिबान को पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने प्रदान कर रहा है ।  इस बात का उल्लेख स्वंय सी. आई. ए. के वरिष्ठ सलाहकार ब्रूस रिडेल ने भी एक लेख में किया है ।

अमेरीका में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले आंदोलनकारी मानते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ जंग के नाम पर पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग पाकिस्तान आंतकवादियों को समर्थन देने में कर रहा है । प्रदर्शनकारोयों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई अपने हितों की पूर्ती के लिए अफगानिस्तान में पिछ्ले 13 सालों से निर्दोष लोगों को मार रहे हैं । लेकिन यह मामला केवल अफगानिस्तान तक ही सीमित नही है इसका दूसरा पहलू भारतीय क्षेत्र के राज्य जम्मू कश्मीर से भी जुडा हुआ है । पाकिस्तान अपने अधिकार वाले कश्मीर क्षेत्र को आंतवादियों के ट्रेनिगं केम्प, सुरक्षित ठिकाने और अभयारण्य के रुप में उपयोग कर रहा है ।

आतंकवाद के विरुद्ध जंग के नाम पर मिलने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग पाकिस्तान अफगानिस्तान और कश्मीर में आतंकावादी गतिविधियों को बढाने के लिए करता है । “अफगानों की हत्या बंद करो” के नाम से आयोजित किए गए इस विरोध प्रदर्शन में हक्कानी नेटवर्क और पाकिस्तान की खुफिया संस्था आई एस आई की खूब आलोचना की गई । विदेशों में रहने वाले अफगान “हबीबा” के नेत्रत्व में कुछ देशों के काले कारनामों का सच अब दुनिया को दिखाना चाहते हैं ताकि आतंकवाद को पौषित करने वाली धनराशी पर रोक लग सके । अब अफगानों के साथ मिलकर भारतीय नुमाईदों को भी चाहिए कि वह विश्व स्तर पर आतंकावाद के नाम पर खेले जा रहे धन उगाही के इस खेल को सार्वजनिक करें ।

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Sanjeev Awasthi has been a news correspondent for more than 14 years. He is currently Managing Editor of Northern Voices Online (NVO News) and Revolution Time.

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