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Entries posted by jagdish
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी कलकत्ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर हैं तथा मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन किया है |

हिंसा के बारे में बातें करना सामान्य बात है. आमतौर पर हम सभी हिंसा विभिन्न रूपों को देखते हैं , देखकर कभी दुखी होते हैं ,कभी सुखी होते हैं ,कभी पराजय कभी हताशा और कभी हिंसा में आशा की किरणें देखते हैं। हिंसा के नाम अनेक हैं,किसी एक नाम से हिंसा को रेखांकित करना संभव [...]

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टेलीविजन में आतंक की खबरों का सबसे ज्यादा उपभोग अमीरों में नहीं होता। अभिजन में नहीं होता। टीवी कवरेज के बारे में यह मिथ है कि टीआरपी बढ़ाने के लिहाज से लाइव कवरेज का इस्तेमाल किया गया। यह संभव है टीआरपी बढ़े और यह भी संभव है टीआरपी घटे। किंतु यह निर्णय तुरंत नहीं लिया [...]

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कश्मीरी पंडितों का वैभव और सांस्कृतिक संपन्नता का इतिहास रहा है। भारत की श्रेष्ठतम बौद्धिक परंपराओं को कश्मीरी पंडितों ने पैदा किया। भारत का मान-सम्मान सारी दुनिया में ऊँचा किया। कश्मीरी पंडित भारत के सबसे सुंदर, मधुरभाषी , ज्ञानी-गुणी लोग रहे हैं। ये लोग हिंसा से कोसों दूर हैं। कश्मीरी पंडित कश्मीरियत की पहचान के [...]

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मुंबई शांत और सामान्य है। भारत-पाक संबंध गरम और नरम हैं। 26 नबम्वर 2008 की घटना को लोग भूलने लगे हैं। शहर अपनी धुन में लौट आया है। शहर शांत है किंतु देश की राजनीति अशांत है। आतंक की खूबी है वह सत्ता को अशांत रखता है। सत्ता के सामने दो ही रास्ते छोड़ता है [...]

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उन्हें लंबे समय से किसी ने नहीं देखा। उन्हें कोई खोजने नहीं जाता। वे जाते हैं तो कभी लौटकर नहीं आते। उनके बीबी-बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य सालों से उनके आने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें कोई खबर नहीं है कि वे कहां हैं किस दशा में हैं। उनके बारे में पुलिस, न्यायालय [...]

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हाल ही में इस्राइल ने फिलीस्तीनी इलाकों में अवैध बस्तियों के निर्माण को स्थगित करने की मांग को विश्व जनमत की मांग को ठुकराकर अपने विस्तारवादी इरादों को एकबार फिर से जाहिर कर दिया है। इससे फिलीस्तीनी जनता का संघर्ष अब तक के सबसे कठिन दौर में दाखिल हो गया है। समस्त राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय [...]

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धार्मिक और मनोरंजन चैनलों पर ज्योतिष कार्यक्रमों की बाढ़ आयी हुई है। इनमें रंग-बिरंगे ज्योतिषियों के जरिए वैचारिक ठगई जारी है। यह मानव सभ्यता की सबसे बड़ी वैचारिक ठगई है। बड़ी-बड़ी कंपनियां इस कला का मुनाफों के विस्तार के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। चैनल बता रहे हैं कि ज्योतिष का संबंध सबसे है।हिन्दू,मुसलमान,ईसाई आदि [...]

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मनमोहन सिंह जब से प्रधानमंत्री बने हैं। वे मीडिया और विशेषज्ञों की आलोचना में नहीं आते। उन्हें प्रधानमंत्री बने 6 साल से ज्यादा समय हो गया है। मीडिया में ममता बनर्जी,शरद पवार ,प्रफुल्ल पटेल ,डी.राजा ,कांग्रेस के क्षेत्रीय नेताओं ,कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों आदि की आलोचना दिखेगी लेकिन मनमोहन सिंह की आलोचना नहीं मिलेगी। ऐसा क्यों [...]

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मनमोहन सिंह का दावा है कि वह विकास पुरूष हैं। विकासपुरूष का उनका विभ्रम सबको आकर्षित कर रहा है। विकास के नाम पर उन्होंने भौतिक आकांक्षाओं का विभ्रम पैदा किया है। कारपोरेट मीडिया को विकास के विभ्रम में कहीं कोई खोट नजर नहीं आ रहा। यदि कोई खोट दिखाने की कोशिश करता है तो उसे [...]

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उत्तर-आधुनिक स्थिति में बहुसांस्कृतिकवाद की धारणा हठात् चर्चा के केन्द्र में आ गई है। इस धारणा का बौद्धिकों के द्वारा विमर्श के लिए बढ़ता आकर्षण इस बात का संकेत है कि इसके पीछे मंशाएं कुछ और हैं। ये लोग फैशनेबुल वस्त्रों की तरह धारणाएं बदल रहे हैं ,धारणाओं के प्रति मनमाना व्यवहार कर रहे हैं। [...]

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