समसामयिक दौर में प्रतीकात्मक आंदोलन हो रहे हैं। इन आंदोलनों को सैलीब्रिटी प्रतीक पुरूष चला रहे हैं। इस दौर के संघर्ष मीडिया इवेंट हैं। ये जनांदोलन नहीं हैं।अन्य प्रतीक पुरूषों की तरह अन्ना हजारे मीडिया पुरूष हैं। इवेंट पुरूष हैं। इनकी अपनी वर्गीय सीमाएं हैं और वर्गीय भूमिकाएं हैं। मीडिया पुरूषों के संघर्ष सत्ता सम्बोधित [...]
Continue reading …ममता बनर्जी की आंधी का असर सीधे वाम मोर्चा और खासकर माकपा नेताओं जैसे बुद्धदेव भट्टाचार्य और गौतम देव के टीवी टॉक शो और टीवी खबरों में साफ देखा जा सकता है। वे स्वीकार कर रहे हैं कि उनके दल से गलतियां हुई हैं। वे जानते हैं उनके रणबाँकुरे जो करते रहे हैं वह भारत [...]
Continue reading …भारत ने 50 ओवरों वाला विश्वकप क्रिकेट टूर्नामेंट अपने नाम कर लिया है। इस टूर्नामेंट का कई मायनों में महत्व है। यह टूर्नामेंट क्रिकेट के साथ महानतम सामाजिक -राजनीतिक और आर्थिक भूमिकाओं के लिए भी हमेशा याद किया जाएगा। यह टूर्नामेंट मंदी के दौर में हो रहा था और इसने भारत के उपभोक्ता बाजार को [...]
Continue reading …फेसबुक संचार की दुनिया में लंबी छलांग है। यह एक ऐसा सामाजिक मंच है जिस पर आप व्यापार,संवाद,संचार,विचार-विमर्श,राजनैतिक प्रचार,सामाजिक गोलबंदी आदि कर सकते हैं। यह ऐसा मंच है जो व्यक्तिगत और सामाजिक एक ही साथ है। यह ऐसा मंच भी है जो संचार के साथ -साथ आपके ऊपर नजरदारी भी करता है। यह सूचनाओं का [...]
Continue reading …मजेदार बात है हमारी संसद अपने दोस्त राष्ट्र अमेरिका के राजनयिकों के केबलों पर संसद का बेशकीमती समय बर्बाद कर रही है। हम हर मामले में अमेरिका की नकल करते हैं लेकिन केबल के मामले में हमने अमेरिकी सीनेट की नकल नहीं की , हाँ, अमेरिका के शासकों की नकल करते हुए उसके बारे में [...]
Continue reading …कांग्रेस पार्टी और मनमोहन सिंह सरकार के लिए विकीलीक के भारतीय केबल राजनीतिक सिरदर्द बनते जा रहे हैं। इन केबलों का जनता पर कितना असर होगा यह कहना मुश्किल है । क्योंकि आम जनता में विदेश नीति कभी प्रौपेगैण्डा का बड़ा विषय नहीं रही है। यहां तक मासमीडिया में भी विदेश नीति बहुत ही सीमित [...]
Continue reading …होली हो और नजीर अकबरावादी पर बातें न हों यह हो नहीं सकता। ब्रज की होली के रंगों को जिन लोगों ने देखा और जिया है उनके लिए होली का अर्थ समझना आसान है ,लेकिन जिन लोगों ने ब्रज की होली नहीं देखी है वे उसके मर्म को समझ नहीं सकते। टीवी से ब्रज की [...]
Continue reading …मनमोहन के बारे में बातें करना बेहद जोखिमभरा काम है। खासकर उसके काव्य व्यक्तित्व पर बातें करते समय यही समस्या रहती है कि आखिर उस पर क्या बात करें ? वह 45 साल से कविताएँ लिख रहा है । वह देखने में जितना सीधा,सरल,सौम्य है, विचारों के क्षेत्र में उतना ही दुर्धर्ष है। विचारों की [...]
Continue reading …विकीलीक के भारत संबंधी केबलों के अंग्रेजी दैनिक ‘ हिन्दू’ में निरंतर प्रकाशन के बाद से संसद में हंगामा मचा हुआ है। रोज सांसद इस अखबार में छपी बासी केबलों पर उबल रहे हैं,मचल रहे हैं,संसद ठप्प कर रहे हैं,मनमोहन सिंह से इस्तीफा मांग रहे हैं। यह प्रच्छन्न तरीके से आने वाले विधानसभा चुनावों में [...]
Continue reading …जापान में प्राकृतिक विनाशलीला का ताण्डव सारी दुनिया को एक नए किस्म के आर्थिक-राजनीतिक संकट की ओर ले जा रहा है। जापान के भूकंप और परमाणु विकिरण का सामाजिक-आर्थिक राजनीतिक प्रभाव सिर्फ जापान तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि इसका असर आने वाले समय में समूची विश्व राजनीति पर पड़ेगा। खासकर वे देश जो परमाणु ऊर्जा [...]
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