यह सबसे बुरी और गलत बात है कि अधिक मुकदमे दर्ज होने का कारण आला पुलिस अधिकारियों द्वारा थानाधिकारी से पूछा जाता है। जबकि इसके विपरीत होना तो यह चाहिये कि जिस थाने में अधिक मुकदमे दर्ज हुए हों, उस थाने को जनता के प्रति अधिक संवेदनशीलता का प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये। आखिर अपराधियों से [...]
पॉंच राज्यों के चुनाव परिणामों से जो सन्देश निकलकर सामने आया है, उसके ये संकेत तो स्पष्ट रूप से प्रकट हो ही चुके हैं कि मतदाता ने केवल कॉंग्रेस, भाजपा और बसपा को ही धूल नहीं चटायी है, बल्कि इसके साथ-साथ अन्ना हजारे और रामदेव को भी मटियामेट कर दिया है। जो इस देश के भ्रष्टाचार [...]
Continue reading …सूचना का अधिकार कानून के तहत उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार केन्द्रीय मामलों में केन्द्रीय सूचना आयोग और प्रादेशिक मामलों में राज्य सूचना आयोग को सूचना अधिकार कानून की रक्षा और क्रियान्वयन की सर्वोच्च जिम्मेदारी दी गयी है। कुछेक मामलों को छोड़कर एक आम नागरिक सूचना आयोगों के निर्णय को मानने को बाध्य होता है। जिन [...]
Continue reading …पॉंच राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में सर्वाधिक चर्चा यूपी अर्थात् उस उत्तर प्रदेश की ही हो रही है, जिसको चार भागों में बॉंटने के बाद मायावती इसका नाम ही समाप्त कर देना चाहती हैं| जिन प्रस्तावित चार प्रान्तों में यूपी को विभाजित करने की मायावती की योजना है, उनमें यूपी का कहीं नाम ही [...]
Continue reading …पॉंच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में किसका ऊंट किस करवट बैठेगा, इस बात का सही-सही पता तो चुनाव परिणामों के बाद ही चलेगा, लेकिन हर ओर उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव परिणामों के बारे में सर्वाधिक चर्चा हो रही है| हो भी क्यों नहीं, जब दिल्ली की सत्ता का किला उत्तर प्रदेश के [...]
Continue reading …भारत के संविधान के बारे में जानकारी रखने वाले सभी विद्वान जानते हैं कि हमारे संविधान के भाग तीन अनुच्छेद-14, 15 एवं 16 में जो कुछ कहा गया है, उसका साफ मतलब यही है कि धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ किया जाने वाला विभेद असंवैधानिक होगा| [...]
Continue reading …आधुनिकतावाद के दो प्रमुख बाईप्रोडक्ट है सामाजिकहिंसा और माओवाद। आधुनिकतावाद की खूबी है कि उसने हिंसा को सहज ,स्वाभाविक और अपरिहार्य बनाया है फलतः हिंसा के प्रति घृणा की बजाय उपेक्षा का भाव पैदा हुआ है। हिंसा के हम अभ्यस्त होते चले गए हैं। घरेलू हिसा से लेकर वर्गीय हिंसा तक के व्यापक फलक को [...]
Continue reading …आरक्षण फिल्म रिलीज हो गयी। तीन राज्यों उत्तरप्रदेश,पंजाब और आंध्र ने इसके प्रदर्शन पर रोक लगायी हुई है। आंध्र में कांग्रेस ,यू.पी. में बहुजन समाज पार्टी और पंजाब में अकाली-भाजपा की राज्य सरकार है। यह संकेत है कला और राजनीति के अन्तर्विरोध का। सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। इस फिल्म का [...]
Continue reading …15 अगस्त, 2011 को हम आजादी की 65वीं सालगिरह मनाने जा रहे भारत में कौन कितना-कितना और किस-किस बात के लिये आजाद है? यह बात अब आम व्यक्ति भी समझने लगा है| इसके बावजूद भी हम बड़े फक्र से देशभर में आजादी का जश्न मनाते हैं| हर वर्ष आजादी के जश्न पर करोड़ों रुपये फूंकते [...]
Continue reading …भारत विभाजन धर्म आधारित राजनीति की सबसे भयावह परिणति था। जिसमें लाखों निर्दोष लोग मारे गए। धर्मकेन्द्रित राजनीति के द्वारा स्वाधीनभाव का जिस तरह अपहरण किया गया और भारत विभाजन हुआ उसका सबसे गंभीर परिणाम यह निकला कि स्वतंत्रता को नकारात्मक और समस्यामूलक और अराजकता का प्रतीक मान लिया गया। यह सबसे बड़ा अविवेकपूर्ण राजनीतिक [...]
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