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	<title>एन. वी. ओ. न्यूज</title>
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	<description>NVO News- North India News, Hindi News</description>
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		<title>मुख्यमंत्री ने किया नेशनल नॉलेज नेटवर्क का शुभारम्भ</title>
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		<pubDate>Thu, 12 Apr 2012 16:00:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>संवाददाता</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रमुख समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[शिमला: मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने आज ऊना के उपायुक्त कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये महत्वाकांक्षी नेशनल नॉलेज नेटवर्क का शुभारम्भ किया। इस प्रकार, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय, एनआईटी, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, टांडा मेडिकल कॉलेज, इंदिरा गांधी चिकित्सालय शिमला, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला और आईआईटी मण्डी अत्याधिक हाई स्पीड नेशनल नॉलेज नेटवर्क सुविधा [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">शिमला: मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने आज ऊना के उपायुक्त कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये महत्वाकांक्षी नेशनल नॉलेज नेटवर्क का शुभारम्भ किया। इस प्रकार, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय, एनआईटी, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, टांडा मेडिकल कॉलेज, इंदिरा गांधी चिकित्सालय शिमला, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला और आईआईटी मण्डी अत्याधिक हाई स्पीड नेशनल नॉलेज नेटवर्क सुविधा से जुड़ गए हैं। यह सुविधा के मिलने से विद्यार्थी देश के किसी भी विश्व स्तरीय संस्थान से व्याख्यानों का लाभा उठा पाएंगे।<br />
नेशनल नॉलेज नेटवर्क के शुभारंभ अवसर पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार एवं नेटवर्क की उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष डा. आर. चिदम्बरम, केंद्र सरकार के वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी सचिव प्रो. एस.पी राघवन, एनआईसी के महानिदेशक डा. बी.के गैरोला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों व प्रतिभागियों ने वीडियो कांफें्रसिंग के माध्यम से दिल्ली से बातचीत की।<br />
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शीर्षक शिक्षण संस्थानों को उच्चतर गति की सुविधा से युक्त नेशनल नॉलेज सेंटर से जोड़ने के लिए राज्य एनआईसी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आई.आई.टी. मण्डी इस नेटवर्क के उपयोग के लिए श्रेष्ठ संस्थान बनकर उभरा है और इस संस्थान में दिए जाने वाले व्याख्यानों का रूड़की के विद्यार्थी लगातार लाभ उठा रहे हैं।<br />
<a href="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/04/cs.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-18903" title="cs" src="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/04/cs-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /></a>प्रो. धूमल ने कहा कि आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग आज समय की मांग है। इस नेटवर्क की स्थापना से विद्यार्थियों को बहुत लाभ होगा क्योंकि वे श्रेष्ठ संस्थानों के शोधकर्ताओं व विज्ञानियों के साथ जुड़ने के अलावा पुस्तकालयों का लाभ भी उठा सकेंगे। इस तरह पुस्तकों पर निर्भर रहने के बजाय विद्यार्थियों को इस नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट पर ही सारी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।<br />
उन्होंने कहा कि यह सुविधा प्रदेश सरकार के हिमस्वां नेटवर्क को भी प्रदान की जाएगी, जिससे इंटरनेट पर हो रहे खर्च में कमी आएगी तथा ई-गवर्नेंस के लिए एक उपयुक्त साधन भी बनेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थान भी शीघ्र इस सुविधा से जुड़ेंगे और हिमाचल प्रदेश सही मायनों में शिक्षा का उत्कृष्ट केन्द्र बनकर उभरेगा।<br />
मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-गवर्नेंस का उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है। प्रदेश सरकार प्रयास कर रही है कि कार्यालयों में कागजों का इस्तेमाल कम से कम हो तथा इससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।<br />
इस परियोजना के शुभारम्भ अवसर पर मुख्य सचिव सुश्री हरिन्द्र हीरा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अजय मित्तल, एनआईसी, हिमाचल प्रदेश के निदेशक डा. सौरभ गुप्ता सहित राज्य सूचना अधिकारी और प्रदेश सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी सीपीआरआई, शिमला से वीडियो कांफ्रंेसिंग के माध्यम से जुड़े थे।<br />
नेशनल नॉलेज नेटवर्क का उद्देश्य ऐसे संस्थानों की स्थापना है जिनमें गुणात्मक शोध सुविधाएं उपलब्ध हों तथा उच्च स्तर के प्रशिक्षित व्यवसायी तैयार किए जा सकें।<br />
डा. सौरभ गुप्ता ने वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से मुख्यमंत्री और अन्यों का करते हुए नेशनल नॉलेज नेटवर्क के माध्यम से विद्यार्थियों और सरकारी कार्यालयों को प्राप्त होने वाली सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। गृह एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव श्री पी.सी धीमान ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।</p>
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		<title>मुख्यमंत्री ने ऊना में किए 76 करोड़ रुपये के उद्घाटन एवं शिलान्यास</title>
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		<pubDate>Thu, 12 Apr 2012 14:31:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>संवाददाता</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>

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		<description><![CDATA[शिमला: मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने आज ऊना विधानसभा क्षेत्र में 76 करोड़ रुपये लागत की विकास योजनाओं का शुभारम्भ एवं शिलान्यास किया। इनमें जिला मुख्यालय के लिए 11.17 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित महत्वाकांक्षी मल निकासी योजना शामिल है, जिससे 32,790 लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने संतोखगढ़ में स्वां नदी तटीकरण परियोजना [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">शिमला: मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने आज ऊना विधानसभा क्षेत्र में 76 करोड़ रुपये लागत की विकास योजनाओं का शुभारम्भ एवं शिलान्यास किया। इनमें जिला मुख्यालय के लिए 11.17 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित महत्वाकांक्षी मल निकासी योजना शामिल है, जिससे 32,790 लोग लाभान्वित होंगे।<br />
मुख्यमंत्री ने संतोखगढ़ में स्वां नदी तटीकरण परियोजना के तीसरे चरण की आधारशिला रखी, जिस पर 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना के अन्तर्गत संतोखगढ़ पुल से पंजाब राज्य की सीमा तक नदी के तटीकरण का कार्य किया जाएगा। इस 7/5 किलोमीटर लम्बे हिस्से का तटीकरण लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा और स्वां नदी की बाढ़ में बह गए 480 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र का सुधार किया जाएगा।<br />
<a href="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/04/cm12april12d.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-18899" title="cm12april12d" src="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/04/cm12april12d-300x180.jpg" alt="" width="300" height="180" /></a>प्रो. धूमल ने ऊना के इंदिरा स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ हॉकी मैदान की आधारशिला भी रखी, जिसका निर्माण लगभग 7 करोड़ रुपये से पूरा होगा और यहां प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण एवं खेल सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने जलग्रां पुल पर 1.07 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पुल, जलग्रां में 35 लाख रुपये से निर्मित राजकीय उच्च विद्यालय भवन, 35 लाख रुपये की लागत से निर्मित राजकीय उच्च विद्यालय बडैहर के भवन, 80 लाख रुपये की लागत से निर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बसदेहरा का लोकार्पण भी किया। उन्होंने ऊना पुल तक सड़क मार्ग को चौड़ा करने के कार्य की आधारशिला रखी, जिस पर 3.41 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा उन्होंने आईआरबी वनगढ़ में 100 प्रशिक्षुओं के लिए बैरक का शिलान्यास किया, जिस पर 1.94 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। उन्होंने देहलन में 62 लाख रुपये से बनने वाले मिनी स्टेडियम का शिलान्यास किया और रामपुर वेला में प्रदेश पथ परिवहन निगम की कार्यशाला का भूमि पूजन किया, जिस पर 85.28 लाख रुपये का अनुमानित व्यय होगा।<br />
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री श्री रविन्द्र सिंह रवि, सांसद श्री अनुराग ठाकुर, स्थानीय विधायक एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री सतपाल सिंह सत्ती, मुख्य संसदीय सचिव श्री वीरेन्द्र कंवर, विधायक श्री बलबीर चौधरी, पूर्व मंत्री एवं राज्य जल प्रबन्धन बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रवीण शर्मा, जिला परिषद अध्यक्षा श्रीमती रानी रणौत, प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष श्री बलबीर बग्गा, उपायुक्त श्री के.आर. भारती, सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।</p>
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		<title>पुलिस बनाम जनता</title>
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		<pubDate>Thu, 05 Apr 2012 08:08:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रमुख समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[विचार मंच]]></category>

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		<description><![CDATA[यह सबसे बुरी और गलत बात है कि अधिक मुकदमे दर्ज होने का कारण आला पुलिस अधिकारियों द्वारा थानाधिकारी से पूछा जाता है। जबकि इसके विपरीत होना तो यह चाहिये कि जिस थाने में अधिक मुकदमे दर्ज हुए हों, उस थाने को जनता के प्रति अधिक संवेदनशीलता का प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये। आखिर अपराधियों से [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह सबसे बुरी और गलत बात है कि अधिक मुकदमे दर्ज होने का कारण आला पुलिस अधिकारियों द्वारा थानाधिकारी से पूछा जाता है। जबकि इसके विपरीत होना तो यह चाहिये कि जिस थाने में अधिक मुकदमे दर्ज हुए हों, उस थाने को जनता के प्रति अधिक संवेदनशीलता का प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये। आखिर अपराधियों से आहत जनता का कानूनी तौर पर उपचार प्रदान करने का काम करने के लिये ही तो पुलिस थानों की स्थापना की गयी है। जिन्हें अधिकतम कानूनी उपचार प्रदान करने के लिये, सवालों के घेरे में खड़ा करना किसी भी सूरत में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। क्या कभी किसी उच्चतम स्तर के चिकित्सा अधिकारी ने नीचे के स्तर के चिकित्सक से यह सवाल किया है कि उसके द्वारा अधिक संख्या में बीमारों का उपचार क्यों किया गया? यदि नहीं तो पुलिस थाने से भी यह नहीं पूछा जाना चाहिये कि उसने अधिक फरियादियों की फरियाद दर्ज क्यों की? क्योंकि पुलिस भी तो आहत व्यक्ति को कानूनी उपचार प्रदान करती है। कानूनी उपचार भी जीवन के लिये उतना ही जरूरी है, जितना कि चिकित्सक द्वारा प्रदान किया जाने वाला शारीरिक या मानसिक उपचार।</strong></p>
</blockquote>
<div style="text-align: justify;">&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;<wbr>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;<wbr>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;-</wbr></wbr></div>
<div style="text-align: justify;">भारत को आजाद हुए छह दशक से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन भारत में आम भारतीय का मान-सम्मान एवं उसकी जानमाल सुरक्षित नहीं हैं। हालात इतने खतरनाक हैं कि राष्ट्रपति भवन तक में चोर अपना कमाल दिखा जाते हैं। ऐसे में आम व्यक्ति की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में सहज कल्पना की जा सकती है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">कहने को तो संविधान में साफ शब्दों में लिखा गया है कि ‘‘कानून के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति को समान समझा जायेगा एवं कानून का सभी को समान संरक्षण प्राप्त होगा।’’ केवल इतना ही नहीं, बल्कि ऐसा प्रावधान संविधान के भाग तीन में नागरिकों के मूल अधिकारों के रूप में प्रदान किया गया है, जिनका उल्लंघन करने का किसी को कोई अधिकार नहीं है और यदि कोई व्यक्ति या स्वयं सरकार भी मूल अधिकारों का उल्लंघन करें तो उनके खिलाफ सीधे देश की सुप्रीम कोर्ट तथा अपने राज्य के हाई कोर्ट में याचिका दायर करके संवैधानिक और कानूनी संरक्षण मांगा जा सकता है। हमारे देश के संविधान में देश के सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट्स को मूल अधिकारों के गारण्टर एवं पहरेदार के रूप में दर्शाया गया है। आजादी के बाद अनेकों बार, अनेकानेक मामलों में सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट्स ने इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह भी किया है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">इसके बावजूद भी बार-बार यह बात सामने आती रहती है कि आज भी आम व्यक्ति को यदि सबसे अधिक भय है, तो केवल-पुलिस से ही है। उस पुलिस से जिसे संविधान में पब्लिक सर्वेण्ट अर्थात् जनता की नौकर लिखा गया है। देश के किसी न किसी हिस्से से आये दिन खबरें आती रहती हैं कि पुलिस ने एक आम व्यक्ति के साथ किस प्रकार से अमानवीय एवं क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया। बल्कि यह कहना अधिक ठीक होगा कि पुलिस लोगों को सुरक्षा दिलाने के बजाय, लोगों को आतंकित एवं भयभीत करने के लिये अधिक प्रचारित होती रहती है या मीडिया द्वारा प्रचारित की जाती रहती है। कथित रूप से पुलिस की इतनी क्रूर एवं भयाक्रान्त कर देने वाली छवि के उपरान्त भी ऐसा माना जाता है कि पुलिस के सहयोग के बिना किसी भी आम-ओ-खास और यहॉं तक कि गुण्डों, अपराधियों और असामाजिक तत्वों का भी काम नहीं चल सकता।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">समाज में मान्यता है कि जहॉं एक ओर बड़े लोगों को पुलिस छाया की तरह से सुरक्षा प्रदान करती है। वहीं दूसरी ओर पुलिस पर गुण्डों को संरक्षण प्रदान करने के आरोप भी लगाये जाते हैं, जबकि आम व्यक्ति की शिकायत रहती है कि पुलिस न मात्र उसकी सुनती ही नहीं, बल्कि पुलिस उसके साथ अभद्रता भी करती रहती है। देश के सभी प्रान्तों में समाज में अधिकतर लोगों का यह भी मानना है कि बड़े लोगों एवं गुण्डों का तो पुलिस कुछ कर नहीं सकती और अपनी भड़ास आम व्यक्ति के विरुद्ध निकालती है। सम्भवत: इसलिये भी पुलिस से आम व्यक्ति सबसे अधिक त्रस्त है। इन सब बातों में कितनी सच्चाई है। इस विषय की पड़ताल करना न तो इस आलेख को लिखने का लक्ष्य है और न हीं ऐसी कोई पड़ताल की गयी है, बल्कि इस आलेख को लिखने के पीछे यह बतलाने का प्रयास है कि जब पुलिस को लोगों की सुरक्षा प्रदान करने के लिये वेतन दिया जाता है, फिर भी पुलिस आम लोगों के विरुद्ध अभद्र व्यवहार करने के लिये बदनाम होती रहती है। ऐसे में आम व्यक्ति पुलिस से कैसे निपट सकता है?</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">हम सभी जानते हैं कि हर समस्या के एक से अधिक पहलू होते हैं। प्रत्येक पहलू को निष्पक्षतापूर्वक समझे बिना साधारण सी समस्या का समाधान सम्भव नहीं हो सकता। ऐसा देखने में आया है कि पुलिस अपनी छवि में कैद है। पुलिसजनों के मनोमस्तिष्क में यह बात घर किये हुए है कि यदि वह अपनी अंग्रेजों की दैन क्रूरता वाली छवि से मुक्त हो गयी तो उसकी महत्ता समाप्त हो जायेगी और उसकी कोई सुनने वाला नहीं है। कुछ सीमा तक इसमें सच्चाई भी है। इस कारण पुलिस अपनी पुरातन और अंग्रेजों की पुलिस दैन अमानवीय छवि में ही सम्भवत: न चाहकर भी कैद है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">इसके विपरीत हमें देखना होगा कि क्या पुलिस के बिना हमारा काम चल सकता है। जब भी कोई मुसीबत आती है, हम सीधे पुलिस थाने में जाकर गुहार करते हैं, बेशक थाने में कथित रूप से बिना लिये दिये सुनवाई नहीं होने के ढेरों आरोप पुलिस के माथे पर हमेशा ही लगते रहते हैं। लेकिन यह भी तो सच है कि पुलिस हमें संरक्षण प्रदान करती है। इसलिये पुलिस के अस्तित्व को आम व्यक्ति के जीवन में नकारा नहीं जा सकता। यदि एक दिन के लिये भी पुलिस को समाज से हटा दिया जावे तो हमारे पड़ौस में रहने वाले कितने ही सफेदपोश चेहरे सरे राह लोगों को लूटते मिल जायेंगे। इस बात में कोई सन्देह नहीं कि पुलिस के नाम से ही आम व्यक्ति की सुरक्षा होती है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">इसके उपरान्त भी इस बात को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि पुलिस को सुरक्षा प्रदान करने के एवज में आम व्यक्ति से अभद्रता करने का हक होना चाहिये। एक सम्मानित व्यक्ति जब पुलिस थाने में जाता है तो पूरी उम्मीद के साथ जाता है कि उसको कानूनी संरक्षण प्रदान किया जायेगा। लेकिन उसे अधिकतर तिरस्कार एवं अपमान ही सहना पड़ता है। थाने की प्रचलित परम्परानुसार हर सम्भव प्रयास यह होता है कि जहॉं तक सम्भव हो फरियादी की एफआईआर दर्ज नहीं करनी पड़े। एफआईआर दर्ज करते ही उस थाना क्षेत्र में एक अपराध की संख्या और बढ़ जाती है। जॉंच-पड़ताल करने के लिये एक मुकदमा और दर्ज हो जाता है। जिसका न्यायालय में चालान करना होता है। पुलिस के आला अधिकारियों को मुकदमों की संख्या बढने का जवाब देना पड़ता है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">यह सबसे बुरी और गलत बात है कि अधिक मुकदमे दर्ज होने का कारण आला पुलिस अधिकारियों द्वारा थानाधिकारी से पूछा जाता है। जबकि इसके विपरीत होना तो यह चाहिये कि जिस थाने में अधिक मुकदमे दर्ज हुए हों, उस थाने को जनता के प्रति अधिक संवेदनशीलता का प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये। आखिर अपराधियों से आहत जनता का कानूनी तौर पर उपचार प्रदान करने का काम करने के लिये ही तो पुलिस थानों की स्थापना की गयी है। जिन्हें अधिकतम कानूनी उपचार प्रदान करने के लिये, सवालों के घेरे में खड़ा करना किसी भी सूरत में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। क्या कभी किसी उच्चतम स्तर के चिकित्सा अधिकारी ने नीचे के स्तर के चिकित्सक से यह सवाल किया है कि उसके द्वारा अधिक संख्या में बीमारों का उपचार क्यों किया गया? यदि नहीं तो पुलिस थाने से भी यह नहीं पूछा जाना चाहिये कि उसने अधिक फरियादियों की फरियाद दर्ज क्यों की? क्योंकि पुलिस भी तो आहत व्यक्ति को कानूनी उपचार प्रदान करती है। कानूनी उपचार भी जीवन के लिये उतना ही जरूरी है, जितना कि चिकित्सक द्वारा प्रदान किया जाने वाला शारीरिक या मानसिक उपचार।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">इसलिये आमजन को सबसे पहला काम तो यह करना होगा कि समाज में ऐसा माहौल बनाया जावे कि अधिक मुकदमे दर्ज करने वाले पुलिस थानों को पुरस्द्भत किया जावे। इसके लिये प्रान्तीय सरकारों को बाकायदा कानून बनाने के लिये बाध्य किया जावे कि जब भी कोई व्यक्ति पुलिस थाने में अपनी फरियाद लेकर जाये, तो सबसे पहले उसका मुकदमा दर्ज किया जावे, उसके बाद यह देखा जावे कि आहत व्यक्ति की ओर से प्रस्तुत तथ्य सत्य हैं या नहीं। इस बात की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी की जा चुकी है। किसी भी अस्पताल में रोगी का केस पहले बनाया जाता है, यह बाद में देखा जाता है कि रोगी को क्या तकलीफ या क्या बीमारी है और या कोई बीमारी है भी या नहीं!</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">दूसरी और सबसे महत्वूपर्ण बात यह है कि हमारे देश में इतने कानून हैं कि पश्‍चिमी देशों के कानूनविदों द्वारा भारत को कानूनों का जंगल कहा जाता है। इस कानूनों के जंगलों की समाज के लिये क्रियान्विती की जिम्मेदारी हमारे प्रशासनिक ढॉंचे में पुलिस के सिर पर डाली है। इसके साथ-साथ यह तथ्य भी ध्यान देने योग्य है कि पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश मुकदमों में से अधिसंख्य मामलों में अपराधी छूट जाते हैं। केवल इतना ही नहीं, बल्कि एक तटस्थ अध्ययन के अनुसार तो सजा पाने वालों में निर्दोष लोगों की संख्या अधिक है। यह तथ्य सरकार से छिपा नहीं है। इसके बावजूद भी इस बीमारी से मुक्ति के लिये कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं सोचा जाता है? यह अपने आप में आश्‍चर्य का विषय है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">हमारे देश में समस्याओं के निराकरण के लिये हमेशा सतही उपचार किये जाते रहे हैं। जबकि सबसे बड़ी समस्या है मूल में, अर्थात् कानून को लागू करने वाली पुलिस के सिपाही से लेकर सबसे बड़े व सीधे प्रथम श्रेणी में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा भर्ती किये जाने वाले आईपीएस तक किसी भी पुलिसजन के लिये किसी भी प्रकार की कानूनी शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं होना। प्रशिक्षण के दौरान कानून सिखाने की औपचारिकता पूर्ण करके इन सबको कानून का विशेषज्ञ बनाया जाता है। यदि इस प्रकार के प्रषिक्षण द्वारा ही कानून सिखाया जाना सम्भव है तो फिर देशभर में कानून के विश्‍वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की स्थापना की आवश्यकता ही नहीं है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">वास्तव में हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहॉं कानूनों का जंगल है और उस कानूनी जंगल को सुरक्षित रखने, उसे देश के हर व्यक्ति के लिये फलित करने की पूरी जिम्मेदारी कानून से अनभिज्ञ पुलिस के लोगों के हाथ में दी गयी है। अर्थात् जिस प्रकार से दूर-दराज गॉंवों में गैर-कानूनी रूप से नीम हकीम लोगों का उपचार करते हैं। उसी प्रकार देशभर में पुलिस द्वारा भी कानूनी उपचार प्रदान करने के लिये विधि-स्नातक की योग्यता नहीं होने के उपरान्त भी खुलेआम नीम-हकीमी कानूनी उपचार प्रदान किया जा रहा है। फिर भी हम आशा करते हैं कि पुलिस कानून के अनुसार हमें सही तरह से संरक्षण प्रदान करे? यह कैसे सम्भव है? जिन लोगों ने विधिवत तरीके से कानून पढ़ा नहीं। जिन्हें संविधान की सर्वोच्च्ता, नागरिक मूल अधिकारों की गरिमा और मानव अधिकारों की पवित्रता का वास्तविक ज्ञान नहीं, उन लोगों से इन सबके क्रियान्वयन एवं इनकी सुरक्षा की अपेक्षा करना सिवा मूर्खता के और क्या है? जब एक पुलिस वाला किसी आहत व्यक्ति को कानूनी उपचार प्रदान करने के बजाय उसके साथ अभद्र व्यवहार कर रहा होता है तो उसे ज्ञात ही नहीं होता है कि वह संविधान के अनुच्छेद- 14, 19, 21 एवं 32 का तो उल्लंघन कर ही रहा है। साथ ही साथ अपने देश को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर खुले तौर पर मानव अधिकारों का उल्लंघन करने वाला देश भी घोषित कर रहा होता है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">पुलिसवाला उपरोक्त कारणों से ऐसा कर रहा है। तो निष्कर्ष की बात यह है कि हम उन लोगों से कानून लागू करने की उम्मीद करते हैं, जो इस बात को जानते ही नहीं कि कानून है क्या? परन्तु इसमें पुलिस का कतई भी दोष नहीं है, बल्कि दोष देश के कर्णधारों का है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">हमारे देश में अंग्रेजों की देन अमानवीय शासन व्यवस्था आज भी ज्यों की त्यों लागू है, जिसके तहत विधि मन्त्रालय का मुखिया अर्थात् सचिव एक आईएएस होता है, जो कि सामान्यत: किसी भी विषय का स्नातक (ग्रेज्युएट) होता है। उससे भी कानून में स्नातक होने की अपेक्षा नहीं है। विधि सचिव के नियन्त्रण में विधि-मन्त्रालय एवं विधि सचिव की सलाह पर विधि-मन्त्री कार्य करते हैं। और विधि-मन्त्रालय ही प्रान्तीय या केन्द्रीय कानूनों में संशोधन करने या नये कानून बनाने का काम करता है। ऐसे में देश की दशा क्या होनी चाहिये? सहज ही कल्पना की जा सकती है। लेकिन हमें इसी देश में रहना है और इसी देश की नीम हकीम पुलिस व्यवस्था से कानूनी संरक्षण भी पाना है। ऐसे में आम व्यक्ति क्या करे?</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">इस विषय के सभी पहलुओं पर चिन्तन-मनन करने के उपरान्त निष्कर्ष रूप में संक्षेप में यही कहा जा सकता है कि एक आम व्यक्ति को तीन मोर्चों पर लगातार कार्य करने की सख्त जरूरत है। तीनों मोर्चों पर काम करने से भी पहले लोगों को सक्रिय एवं अराजनैतिक समूहों के रूप में समर्पित होकर संगठित होने की जरूरत है, क्योंकि अकेले व्यक्ति की आवाज किसी को सुनाई नहीं देती है। संगठित होकर आपको निम्न तीन मोर्चों पर लगातार एवं प्रतिदिन काम करने होंगे-</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;"><strong><a href="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/04/indian-police.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-18893" title="indian-police" src="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/04/indian-police-300x236.jpg" alt="" width="300" height="236" /></a>जनबल एवं धनबन की ताकत :</strong> सबसे पहले आपको अपने संगठन में जनबल एवं धनबन की ताकत बढाने के लिये प्रतिदिन लगातार काम करते रहना होगा। जिससे कि आपको कभी भी अपने उद्देश्य के लिये शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने या आन्दोलन के लिये अपने ही सदस्यों की पर्याप्त संख्या, जिसे प्रशासन भीड़ कहता है, को जुटाने में मुश्किलातों का सामना नहीं करना पडे़। इसी प्रकार से किसी भी कार्य को अंजाम देने के लिये संसाधनों की अत्यन्त जरूरत होती है, जिनके लिय धन की पर्याप्तता एवं लगातार उपलब्ध्ता बहुत जरूरी है। इसलिये नियमित रूप से सही स्त्रोतों से धन संग्रह करना भी अत्यन्त जरूरी है। जिससे कि धन की कमी में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;"><strong>कुव्यवस्था का विरोध एवं समाधान-कानून की उपाधि की अनिवार्यता :</strong> दूसरा, आपको अव्यावहारिक एवं गैर- कानूनी तथा आम व्यक्ति के हितों के विरुद्ध जारी कुव्यवस्था का न मात्र लगातार और हर मंच पर विरोध करना है, बल्कि उसमें सुधार के लिये सुझाव एवं समाधान भी पेश करने होंगे। जिससे कि केन्द्र एवं राज्यों की सरकारें आपकी पीड़ा एवं पीड़ा के कानूनी उपचार को समझ सके। प्रस्तुत विषय में अपराधों की जॉंच करने वाले प्रत्येक पुलिसजन, आईपीएस एवं आईएएस की भर्ती की पहली और जरूरी शर्त के रूप में सभी के लिये कानून की उपाधि की अनिवार्यता को लागू करवाने के लिये लगातार मांग और लम्बे जन-आन्दोलन करने की जरूरत है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;"><strong>प्रचलित व्यवस्था तथा कानूनों का आदर और पालन करना :</strong> तीन, जब तक उपरोक्त परिवर्तन नहीं होते हैं, तब तक देश के वफादार नागरिक होने के नाते प्रचलित व्यवस्था तथा कानूनों का आदर और पालन करना हम सबका प्रथम धर्म और कानूनी कर्त्तव्य है। अत: प्रचलित कानून के अनुसार पुलिस को कानून का क्रियान्वयन करने के लिये बाध्य किया जावे। जिसके लिये हमें एक सुनियोजित और कारगर नीति पर कार्य करना होगा और इसे पूर्ण धैर्य पूर्वक  अंजाम तक पहुंचाना होगा।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">भारत में प्रचलित साक्ष्य अधिनियम के तहत एक प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यी की गवाही के आधार पर सुप्रीम कोर्ट किसी भी अपराधी को फांसी तक की सजा बहाल रख सकता है, तो फिर आप इस बात को क्यों भूल जाते हैं कि पुलिस द्वारा आम व्यक्ति के विरुद्ध अभद्रता किये जाने या गाली-गलोंच करने के लिये पुलिस के विरुद्ध वही कानून कैसे मूक रह सकता है? जरूरत है, कानून के समक्ष, कानूनी रूप से, यह सिद्ध करने की, कि किसी पुलिसजन ने आपके साथ अभद्रता एवं गाली-गलोंच की है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">इसके लिये अनेक प्रकार के टिप्स (संघर्ष सूत्र) हो सकते हैं, जिन्हें हम भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के प्रशिक्षण शिविरों में बास के कार्यकर्ताओं को बतलाते हैं। उन्हें सार्वजनिक करना उचित नहीं है। क्योंकि विस्तार से समझाए बिना नकारात्मक सोच के पाठक उनका नकारात्मक अर्थ निकाल सकते हैं,  लेकिन एक तरीका पाठकों के हित में सामने प्रस्तुत करना जरूरी है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">लेकिन सबसे पहले आपको उक्त विवेचन के प्रकाश में इस बात को ध्यान में रखना होगा कि पुलिस को नीम हकीमी कानूनी उपचार करने का लाईसेंस जनता द्वारा निर्वाचित सरकार द्वारा ही तो दिया गया है। यही नहीं पुलिस अनेक राजनैतिक दबावों में भी काम करती है। अधिक मुकदमें दर्ज होने पर थाने के प्रभारी से उच्च पुलिस अधिकारी सवाल-जवाब करते हैं। कहीं भी अपराधियों द्वारा वारदात करने पर पुलिस को ही अकर्मण्यता का दोषी माना जाकर भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस को सर्वाधिक बदनाम एवं प्रचारित किया जाता है, बेशक वातानुकूलित कक्षों में विराजमान अन्य अनेक सफेदपोश उच्चाधिकारी कितने ही अधिक भ्रष्ट क्यों न हों? इन हालातों में पुलिस किस प्रकार की मानसिकता से गुजर रही होती है, इसे भी हमें हर और हर कदम पर समझकर याद रखना होगा।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">इस पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए जब भी पुलिस द्वारा अपना फर्ज निर्वाह करने में आनाकानी की जावे, अभद्रता या गाली-गलोंच की जावे या फरियादी का मुकदमा दर्ज करने से इनकार किया जावे तो सुसभ्य तरीके से समूह के रूप में दुबारा पुलिस के समक्ष जाएँ और पीड़ित व्यक्ति की बात को फिर से थाना प्रभारी या उपलब्ध थाने के वरिष्ठतम अधिकारी/निरीक्षक/हैड कॉंस्टेबल के समक्ष तथ्यों सहित पेश करें। बहुत अधिक सम्भावना है कि आपकी बात सुन ली जावेगी और मामला दर्ज करके पुलिस मामले पर जरूरी कानूनी कार्यवाही करेगी, क्योंकि पुलिसवाले भी समाज के ही हिस्से हैं। उनको वेतन इसी बात के लिये मिलता है, और इसी से उनके  परिवार का पालन-पोषण होता है। इसके अलावा पुलिसवालों की किसी आम व्यक्ति से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं होती है!</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">लेकिन यदि आपका वास्ता किसी दुष्ट प्रकृति के ऐसे पुलिसवाले से पड़े जो अपने फर्ज को भूलकर वर्दी के नशे में आपका तिरस्कार एवं अपमान करने का प्रयास करे, तो सबसे पहले तो इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज रहे आनन्द नारायण मुल्ला की इस बात को याद रखें, जो उन्होंने अपने एक निर्णय में लिखी है कि <strong>पुलिस वर्दीधारी गुण्डों का गिरोह है।</strong> अत: चुपचाप थाने से बाहर आ जावें, क्योंकि वर्दीधारी गुण्डे आपके साथ कैसा भी दुर्व्यवहार कर सकते हैं। बाहर आकर  पीड़ित  की ओर से सारी घटना की रिपोर्ट फिर से सम्बन्धित पुलिस अधीक्षक के नाम बनायी जावे, जिसमें उल्लेख किया जावे कि उपस्थित थाना प्रभारी (या जो भी हो) द्वारा रिपोर्ट लिखने से इनकार करने एवं  पीड़ित के साथ अभद्रता या गाली-गलोंच से पेश आने के कारण दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 (3) के तहत यह रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को प्रस्तुत करने की मजबूरी है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">याद रहे कि इस रिपोर्ट के साथ आपके समूह के किन्हीं दो समझदार, विश्‍वसनीय, परिपक्व एवं निर्भीक लोगों को थाने में हुई आपराधिक घटना का प्रत्यक्षदर्शी गवाह बनाया जावे और इन दोनों गवाहों के पुलिस अधीक्षक के नाम बनायी गयी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करवाये जावें। रिपोर्ट के तथ्यों के समर्थन में  पीड़ित एवं दोनों गवाहों की ओर से 10-10 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टॉम्प पेपर पर, शपथ- पत्र बनवाकर रिपोर्ट के साथ संलग्न की जावे, जिनका ब्यौरा रिपोर्ट में दिया जावे। समस्त विवरण रिपोर्ट आदि की फोटो कॉपी अपने पास अवश्य रखें। रिपोर्ट के अन्त में साफ शब्दों में लिखा जावे कि  पीड़ित के मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाने के साथ-साथ थाने में अभद्रता करने के लिये दोषी लोगों (थाने में जाते समय पुलिस वालों की वर्दी पर लगी नेम प्लेट पर नाम पढ लें और यदि किसी ने नेम प्लेट नहीं लगा रखी हो तो उसका चेहरा, बनावट, रंग, उम्र आदि का उल्लेख रिपोर्ट में करें) के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की जावे। अन्त में पुलिस अधीक्षक को लिखें के यदि उनकी रिपोर्ट तत्काल दर्ज कर कानूनी उपचार उपलब्ध नहीं करवाये गये तो विवश होकर मामला न्यायालय में पेश करना पड़ेगा।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">यदि आप जिला मुख्यालय पर रहते हों तो 4-5 समझदार लोग समूह के रूप में ही पुलिस अधीक्षक से मिलकर रिपोर्ट पेश करें एवं उसकी पावती अवश्य ही प्राप्त कर लें। अन्यथा फैक्स या रजिस्टर्ड-एडी के जरिये अपनी रिपार्ट भेजें। रिपार्ट में  पीड़ित का फोन एवं मोबाइल नम्बर अवश्य लिखें। पुलिस अधीक्षक को फोन/मोबाइल पर भी सम्पर्क करें और 4-5 दिन तक इन्तजार करें। यदि 4-5 दिन में कोई कार्यवाही नहीं हो तो पहले फोन पर फिर से बात करें और यदि कोई सन्तोषजनक जवाब नहीं मिले तो शपथ-पत्र की फोटो प्रति एवं  पीड़ित की रिपोर्ट सहित मामले को किसी तटस्थ, समझदार एवं अनुभवी वकील के माध्यम से स्थानीय कोर्ट में पेश करें, जिसमें थाना प्रभारी के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक को कानूनी कार्यवाही नहीं करने के लिये दोषी ठहराकर पार्टी बनाया जावे। साथ ही फिर से फरियादी एवं दोनों गवाहों के नये शपथ- पत्र कोर्ट में पेश करने को वकील से कहें। हो सके तो पीड़ित एवं दोनों गवाहों के बयान दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत कोर्ट के समक्ष दर्ज करवा दिये जावें। ताकि मामले की पुलिस जॉंच के दौरान पुलिस द्वारा आपके गवाहों के बयानों को नकारे जाने की कोई सम्भावना नहीं रहें।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">तीन मोर्चों पर की जाने वाली उपरोक्त समस्त कार्यवाही में लोगों का गवाह के रूप में सहयोग व समर्थन तथा धन की जरूरत होगी। साथ ही साथ भाग-दौड़ में मानसिक सम्बल की भी जरूरत होती है, जिसके लिये हर कोई साधारण व अकेला व्यक्ति सक्षम एवं समर्थ नहीं हो सकता है। इसलिये हमने समूह के रूप में संगठित होने की बात पर जोर दिया है और संगठन भी ऐसा हो, जिसमें जनबल एवं धनबल की मजबूत ताकत हो। ऐसे ही लक्ष्यों को पाने की लिये हमारे द्वारा 1993 में भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) की स्थापना की गयी है। लेकिन मात्र इस संस्थान की सदस्यता ग्रहण करने से भी कुछ नहीं हो सकता।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">सदस्यों को सदस्यता ग्रहण करने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर और स्थानीय स्तर पर इस संस्थान के मंच पर लगातार जनबल एवं धनबल की ताकत को बढाते रहना होगा। अन्यथा केवल सदस्यता ग्रहण करने से कुछ नहीं होगा। फिर भी याद रहे कि किसी भी कार्य की शुरुआत पहले कदम से ही होती है। जो हजारों लोगों ने सदस्य बनकर उठा लिया है। अगले कदम के लिये प्रयास करें और धैर्य रखें। किसी भी पेड़ में फल लगने में समय लगता है और फल लगने तक धैर्य के साथ-साथ पेड़ को सींचना तो होता ही है, उसे संरक्षित भी रखना पड़ता है। क्या आप भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान नाम के इस पेड़ को धैर्यपूर्वक, सींचने, संरक्षित रखने और फलते-फूलते देखने के लिये दृढ़प्रतिज्ञ होकर तत्पर हैं? यदि हॉं तो आप केवल पुलिस से ही नहीं, हर प्रकार के अन्याय से निपट सकने में सक्षम बन सकते हैं। तो फिर विलम्ब किस बात का? अपने सद्प्रयास शुरू करें-आज, अभी और तत्काल। हम सदैव से कहते रहे हैं कि-</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">एक साथ आना शुरुआत है,</div>
<div style="text-align: justify;">एक साथ रहना प्रगति है और</div>
<div style="text-align: justify;">एक साथ काम करना सफलता है।</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;">भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान के 5370 आजीवन सदस्य यदि उपरोक्त बताये अनुसार सच्चे अर्थों में एकजुट हो सकें तो कोई कारण नहीं कि उनकी बात नहीं सुनी जावे और उनके अधिकारों का हनन करने की कोई हिमाकत करके कानून की सजा पाने से बच सके। एक बार दिल से शुरुआत करके तो देखें। आपका साथी-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा &#8216;निरंकुश&#8217;, राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास), 0141  -2222225  मो. 98285-02666</div>
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		<title>कुल्लू जिला में चार वर्ष में 113.96 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मंजूर</title>
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		<pubDate>Tue, 03 Apr 2012 14:00:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>संवाददाता</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रमुख समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[कुल्लू: प्रदेश सरकार ने कुल्लू जिला में सीमित संभावनाओं के बावजूद औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। इन्हीं प्रयासों के चलते जिले में कार्यरत लघु एवं अति लघु औद्योगिक इकाईयों की संख्या 1844 तक जा पहुंची हैं। इनका कुल पूंजी निवेश 50.73 करोड़ रूपये है तथा इनमें लगभग 11,119 लोगों को [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">कुल्लू: प्रदेश सरकार ने कुल्लू जिला में सीमित संभावनाओं के बावजूद औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। इन्हीं प्रयासों के चलते जिले में कार्यरत लघु एवं अति लघु औद्योगिक इकाईयों की संख्या 1844 तक जा पहुंची हैं। इनका कुल पूंजी निवेश 50.73 करोड़ रूपये है तथा इनमें लगभग 11,119 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है।<br />
इनके अलावा लगभग 15.50 करोड़ के निवेश से दो मध्यम दर्जे की इकाइयों ने भी उत्पादन शुरू किया है, जिनमें 147 लोगों को सीधा रोजगार मिला है। वर्तमान प्रदेश सरकार के लगभग सवा चार वर्ष के शासनकाल में करीब 113.96 करोड़ रूपये के निवेश के 238 औद्योगिक प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। इनमें लगभग ढाई हजार लोगों को सीधा रोजगार देने का प्रस्ताव है। इसी अवधि में कुल्लू जिला में 244 इकाईयों ने उत्पादन शुरू किया। इनमें लगभग 17 करोड़ का निवेश हुआ और करीब दो हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला।</p>
<p style="text-align: justify;">वित वर्ष 2011-12 में सरकार ने 83 उद्यमियों को कुल्लू जिला में लगभग 50 करोड़ का निवेश करने की स्वीकृतियां प्रदान कीं। इनमें लगभग 790 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। बीते वित वर्ष में ही लगभग 2.37 करोड़ के निवेश से 43 इकाईयों ने कार्य करना शुरू किया। इन इकाईयों में 413 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है।<br />
उद्योग विभाग प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत भी युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। चार वर्षों में कुल 279 स्वरोजगारियों के लिए 4.12 करोड़ के मामले स्वीकृत किए गए। 52 इकाईयों को प्लांट व मशीनरी पर लगभग 2.09 करोड़ की सब्सिडी दी गई। ट्रांसपोर्ट सब्सिडी के रूप में 24 लाख से अधिक का अनुदान दिया गया। 680 बेरोजगार युवाओं को अनुसूचित जाति उपयोजना और पिछड़ा क्षेत्र उपयोजना के तहत 941 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। 934 अन्य युवाओं को भी ट्रेनिंग दी गई। इस प्रकार प्रदेश सरकार उद्योग विभाग के माध्यम से कुल्लू जिला में औद्योगीकरण व स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है।</p>
<blockquote><p>1844 इकाईयां 11 हजार लोगों को दे रही हैं रोजगार, इस दौरान जिला में 244 औद्योगिक इकाईयों ने शुरू किया उत्पादन</p></blockquote>
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		<title>हिमाचल प्रदेश लोकायुक्त बिल के प्रारूप पर लगाई गई आपत्तियां अनावश्यक: डॉ. कपाहटिया</title>
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		<pubDate>Tue, 03 Apr 2012 13:48:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>एन. वी. ओ. न्यूज</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>

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		<description><![CDATA[शिमला: टीम अन्ना द्वारा हिमाचल प्रदेश लोकायुक्त बिल के प्रारूप पर लगाई गई आपत्तियों व अनावश्यक टिप्पणियों पर राज्य मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष डा. अशोक कपाहटिया ने आश्चर्य व निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल सशक्त लोकायुक्त कानून बनाने के लिए कृतसंकल्प हैं और इस उद्देश्य की पूर्ति [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">शिमला: टीम अन्ना द्वारा हिमाचल प्रदेश लोकायुक्त बिल के प्रारूप पर लगाई गई आपत्तियों व अनावश्यक टिप्पणियों पर राज्य मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष डा. अशोक कपाहटिया ने आश्चर्य व निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल सशक्त लोकायुक्त कानून बनाने के लिए कृतसंकल्प हैं और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए समाज के सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। कारगर व रचनात्मक सुझावों को इस विधेयक में जोड़ा जा सकता है।<br />
डा. कपाहटिया ने कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश लोकायुक्त विधेयक के प्रारूप पर न केवल सुझाव व आपत्तियां सार्वजनिक रूप से आमंत्रित की हैं बल्कि मीडिया के माध्यम से भी यह प्रचारित किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग व संगठन इस प्रारूप पर अपने सुझाव भेज सकें। उन्होंने कहा कि टीम अन्ना की यह आपत्ति कि इसे मीडिया इवेंट बनाकर पेश किया गया, सर्वथा अनुचित व अनावश्यक है। उन्होंने पूछा कि जनता की कानून बनाने में भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करने में आपत्तिजनक क्या है, जबकि स्वयं टीम अन्ना इस बात की वकालत करती रही है।<br />
मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोकायुक्त विधेयक के प्रारूप की तुलना केन्द्र के लोकपाल से करना भी पूर्वाग्रह व जानकारी के अभाव से प्रेरित है। इस प्रारूप में मुख्यमंत्री से लेकर पंचायत सदस्य तक और मुख्य सचिव से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी तक को कानून की ज़द में रखा गया है।<br />
प्रारूप में लोकायुक्त को स्वयं संज्ञान लेने, स्वतंत्र जांच करने तथा स्वतंत्र रूप से अभियोजन तंत्र का प्रावधान किया गया है, जिसमें सरकार का किसी भी स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। जांच पूरी होने पर विशेष न्यायालय गठित करने तथा एक वर्ष के भीतर भ्रष्टाचार के मामलों पर फैसला करने का आग्रह है। यदि विशेष न्यायालय में एक वर्ष में फैसला नहीं होता तो देरी का कारण लोकायुक्त को देना होगा और इसकी अधिकतम समयावधि दो वर्ष से अधिक नहीं हो सकती। लोकायुक्त को भ्रष्ट तरीके से अर्जित चल व अचल सम्पत्ति जब्त करने तथा विभागीय कार्यवाही की संस्तुति करने का भी पूर्ण अधिकार है।<br />
उन्होंने कहा कि प्रारूप की धारा-13 (अपप) (अपपप) के अन्तर्गत अभियोग पूर्व सक्षम प्राधिकरण से अनुमति लेने के प्रावधान पर टीम अन्ना की आपत्ति भी निराधार प्रतीत होती है। इस प्रावधान के अनुसार अभियोजन की अनुमति सरकार को 90 दिन के भीतर देनी होगी, अन्यथा इसे स्वतः स्वीकृत माने जाने का प्रावधान है। इस धारा में कहीं भी अभियोजना रद्द करने का उल्लेख नहीं है। पुनरावलोकन का अनुरोध मानने के लिए भी लोकायुक्त बाध्य नहीं है। विधेयक के प्रारूप की धारा 28 (प) (पप) में भ्रष्टाचार के मामलों की लोकायुक्त को जानकारी देने वाले व्यक्तियों की उत्पीड़न से विशेष सुरक्षा की बात भी कही गई है।<br />
डा. कपाहटिया ने कहा कि प्रजातंत्र में किसी भी संस्था को निरंकुश नहीं छोड़ा जा सकता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए लोकायुक्त को पदच्युत करने की शक्ति केवल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को दी गई है न कि सरकार को। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सख्त प्रावधान होने पर भी यह कानून भ्रष्ट व्यक्तियों को कैसे संरक्षण देगा, टीम अन्ना को यह स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि टीम अन्ना कांग्रेस व भाजपा में आलोचनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए तर्कहीन टिप्पणियां कर रही है।</p>
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		<title>हाईड्रोजन : भविष्‍य की ऊर्जा</title>
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		<pubDate>Fri, 30 Mar 2012 09:46:03 +0000</pubDate>
		<dc:creator>एन. वी. ओ. न्यूज</dc:creator>
				<category><![CDATA[प्रमुख समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[हाईड्रोजन-एक रंगहीन, गंधहीन गैस है, जो पर्यावरणीय प्रदूषण से मुक्‍त भविष्‍य की ऊर्जा के रूप में देखी जा रही है। वाहनों तथा बिजली उत्‍पादन क्षेत्र में इसके नये प्रयोग पाये गये हैं। हाईड्रोजन के साथ सबसे बड़ा लाभ यह है कि ज्ञात ईंधनों में प्रति इकाई द्रव्‍यमान ऊर्जा इस तत्‍व में सबसे ज्‍यादा है और [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">हाईड्रोजन-एक रंगहीन, गंधहीन गैस है, जो पर्यावरणीय प्रदूषण से मुक्‍त भविष्‍य की ऊर्जा के रूप में देखी जा रही है। वाहनों तथा बिजली उत्‍पादन क्षेत्र में इसके नये प्रयोग पाये गये हैं। हाईड्रोजन के साथ सबसे बड़ा लाभ यह है कि ज्ञात ईंधनों में प्रति इकाई द्रव्‍यमान ऊर्जा इस तत्‍व में सबसे ज्‍यादा है और यह जलने के बाद उप उत्‍पाद के रूप में जल का उत्‍सर्जन करता है। इसलिए यह न केवल ऊर्जा क्षमता से युक्‍त है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। वास्‍तव में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय गत दो दशकों से हाईड्रोजन ऊर्जा के विभिन्‍न पहलुओं से संबंधित वृहत् अनुसंधान, विकास एवं प्रदर्शन (आरडीएंडडी) कार्यक्रम में सहायता दे रहा है। फलस्‍वरूप वर्ष 2005 में एक राष्‍ट्रीय हाईड्रोजन नीति तैयार की गई, जिसका उद्देश्‍य हाईड्रोजन ऊर्जा के उत्‍पादन, भंडारण, परिवहन, सुरक्षा, वितरण एवं अनुप्रयोगों से संबंधित विकास के नये आयाम उपलब्‍ध कराना है। हालांकि, हाईड्रोजन के प्रयोग संबंधी मौजूदा प्रौद्योगिकियों के अधिकतम उपयोग और उनका व्यावसायिकरण किया जाना बाकी है, परन्‍तु इस संबंध में प्रयास शुरू कर दिये गये हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाईड्रोजन उत्‍पादन</strong><strong></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>    <a href="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/03/h2o.jpg"><img class="alignright size-full wp-image-18882" title="h2o" src="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/03/h2o.jpg" alt="" width="300" height="220" /></a></strong>हाईड्रोजन पृथ्‍वी पर केवल मिश्रित अवस्‍था में पाया जाता है और इसलिए इसका उत्‍पादन इसके यौगिकों के अपघटन प्रक्रिया से होता है। यह एक ऐसी विधि है जिसमें ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है। विश्‍व में 96 प्रतिशत हाईड्रोजन का उत्‍पादन हाईड्रोकार्बन के प्रयोग से किया जा रहा है। लगभग चार प्रतिशत हाईड्रोजन का उत्‍पादन जल के विद्युत अपघटन के जरिये होता है। तेल शोधक संयंत्र एवं उर्वरक संयंत्र दो बड़े क्षेत्र है जो भारत में हाईड्रोजन के उत्‍पादक तथा उपभोक्‍ता हैं। इसका उत्‍पादन क्‍लोरो अल्‍कली उद्योग में उप उत्‍पाद के रूप में होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">     हाईड्रोजन का उत्‍पादन तीन वर्गो से संबंधित है, जिसमें पहला तापीय विधि, दूसरा विद्युत अपघटन विधि और प्रकाश अपघटन विधि है। कुछ तापीय विधियों में ऊर्जा संसाधनों की जरूरत होती है, जबकि अन्‍य में जल जैसे अभिकारकों से हाईड्रोजन के उत्‍पादन के लिए बंद रासायनिक अभिक्रियाओं के साथ मिश्रित रूप में उष्‍मा का प्रयोग किया जाता है। इस विधि को तापीय रासायनिक विधि कहा जाता है। परन्‍तु यह तकनीक विकास के प्रारंभिक अवस्‍था में अपनाई जाती है। उष्‍मा मिथेन पुनचक्रण, कोयला गैसीकरण और जैव मास गैसीकरण भी हाईड्रोजन उत्‍पादन की अन्‍य विधियां हैं। कोयला और जैव ईंधन का लाभ यह है कि दोनों स्‍थानीय संसाधन के रूप में उपलब्‍ध रहते हैं तथा जैव ईंधन नवीकरणीय संसाधन भी है। विद्युत अपघटन विधि में विद्युत के प्रयोग से जल का विघटन हाईड्रोजन  और ऑक्‍सीजन में होता है तथा यदि विद्युत संसाधन शुद्ध हों तो ग्रीन हाऊस गैसों के उत्‍सर्जन में भी कमी आती है।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाईड्रोजन भंडारण</strong><strong></strong></p>
<p style="text-align: justify;">इससे संबंधित तकनीकी के वृहत् व्‍यावसायीकरण की दृष्टि से परिवहन के लिए हाईड्रोजन का भंडारण सभी तकनीकियों में से चुनौतीपूर्ण तकनीक है। गैसीय अवस्‍था में भंडारण करने का सबसे आम तरीका सिलेंडर में उच्‍च दबाव पर रखना है। हालांकि यह सबसे हल्‍का तत्‍व है जिसे उच्‍च दाब की आवश्‍यकता होती है। इसे द्रव अवस्‍था में क्रायोजिनिक प्रणाली में रखा जाता है, लेकिन इसमें अधिक ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है। इसे धात्विक हाईड्राइड, द्रव कार्बनिक हाईड्राइड, कार्बन सूक्ष्‍म संरचना तथा रासायनिक रूप में इसे ठोस अवस्‍था में भी रखा जा सकता है। इस क्षेत्र में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय अनुसंधान एवं विकास संबंधी परियोजनाओं में मदद कर रही है।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="text-decoration: underline;">प्रयोग</span></strong><strong></strong></p>
<p style="text-align: justify;">     उद्योगों में रासायनिक पदार्थ के रूप में इस्‍तेमाल के अलावा इसे वाहनों में ईंधन के तौर पर भी प्रयोग किया जा सकता है। आंतरिक ज्‍वलन इंजनों (Internal combustion engines) और ईंधन सैलों के जरिए बिजली उत्‍पादन के लिए भी इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है। हाईड्रोजन के क्षेत्र में देश में आंतरिक ज्‍वलन इंजनों, हाईड्रोजन युक्‍त सीएनजी और डीजल के प्रयोग के लिए अनुसंधान और विकास परियोजनाओं तथा हाईड्रोजन ईंधन से चलने वाले वाहनों का विकास किया जा रहा है। हाइड्रोजन ईंधन वाली मोटरसाइकिलों और तिपहिया स्‍कूटरों का निर्माण और प्रदर्शन किया गया है। हाईड्रोजन ईंधन के प्रयोग वाले उत्‍प्रेरक ज्‍वलन कुकर (Catalytic combustion cooker) का भी विकास किया गया है। बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय ने वाणिज्यिक लाभ वाली मोटरसाइकिलों और तिपहिया वाहनों में सुधार किया है, ताकि वे हाईड्रोजन ईंधन से चलाए जा सकें। वाहनों के लिए हाईड्रोजन युक्‍त सीएनजी उपलब्‍ध कराने के लिए नई दिल्‍ली में द्वारका में एचसीएनजी स्‍टेशन खोला गया है, जिसके लिए मंत्रालय ने आंशिक आर्थिक सहायता भी दी है। प्रदर्शन और परीक्षण वाहनों के लिए इस स्‍टेशन से बीस प्रतिशत तक हाईड्रोजन युक्‍त सीएनजी गैस दी जाती है। हाईड्रोजन युक्‍त सीएनजी (एच सीएनजी) को कुछ किस्‍म के वाहनों-बसों, कारों और तिपहिया वाहनों में ईंधन के तौर पर इस्‍तेमाल करने के लिए विकास-सह-प्रदर्शन परियोजना को भी लागू किया जा रहा है। बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान-आईआईटी, दिल्‍ली, हाईड्रोजन ईंधन से चलने वाला जनरेटर सेट भी विकसित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">   हाइड्रोजन ऊर्जा का एक और उपयोग ईंधन सैल के रूप में है, जो एक इलेक्‍ट्रोकैमिकल उपकरण है, जिससे हाईड्रोजन की रासायनिक ऊर्जा को बिना ज्‍वलन के सीधे बिजली में बदला जा सकता है। बिजली उत्‍पादन की यह एक स्‍वच्‍छ और कुशल प्रणाली है। इसका इस्‍तेमाल यूपीएस प्रणालियों यानी बेरोक-टोक बिजली आपूर्ति वाली प्रणालियों में बैटरियों और डीजल जनरेटरों के स्‍थान पर किया जा सकता है। वाहनों और बिजली उत्‍पादन में ईंधन सैलों की उपयुक्‍तता को देखते हुए दुनियाभर में कई संगठन इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास कार्य कर रहे हैं। इन ईंधन सैलों को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक ले जाकर इस्‍तेमाल करने के बारे में भी प्रयोग हो रहे हैं। इस समय ईंधन सैल की लागत कम करने और इसके इस्‍तेमाल की अवधि को बढ़ाने पर ध्‍यान दिया जा रहा है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के ईंधन सैल कार्यक्रम का उद्देश्‍य विभिन्‍न प्रकार के ईंधन सैलों के लिए अनुसंधान और विकास गतिविधियों को सहायता देना है।</p>
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		<title>पर्यटन विकास निगम के बेडे़ में जुडेंगी पांच लग्जरी कोच</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Mar 2012 12:12:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>एन. वी. ओ. न्यूज</dc:creator>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>

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		<description><![CDATA[शिमला: हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के निदेशकमंडल ने निगम के कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का पूरा बकाया जारी करने और वर्ष 2006 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित वेतनमानों के आधार पर लीव इनकैशमेंट देने को स्वीकृति प्रदान की है। इन देनदारियों पर निगम पर 2.95 करोड़ का वित्तीय बोझ पड़ेगा। मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">शिमला: हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के निदेशकमंडल ने निगम के कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का पूरा बकाया जारी करने और वर्ष 2006 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित वेतनमानों के आधार पर लीव इनकैशमेंट देने को स्वीकृति प्रदान की है। इन देनदारियों पर निगम पर 2.95 करोड़ का वित्तीय बोझ पड़ेगा। मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल, जो पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष भी हैं, ने गत सायं हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के निदेशक मंडल की 129वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align: justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि अप्रैल, 2012 के दूसरे सप्ताह में निगम के बेड़े में 1.30 करोड़ रुपये लागत की पांच लग्जरी कोच जोड़ी जाएंगी जबकि चार वाल्वो और परिवहन शाखा की 15 डीलक्स बसें पहले ही चल रही हैं। नई कोच मनाली-रोहतांग रूट पर चलाई जाएगी जिससे क्षेत्र में यातायात दबाव को कम किया जा सके। साथ ही इससे निगम की परिवहन शाखा की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी और मनाली व अन्य क्षेत्रों का दौरा करने वाले पर्यटकों और बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी।</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/03/hptdc-bus.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-18878" title="hptdc-bus" src="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/03/hptdc-bus-300x193.jpg" alt="" width="300" height="193" /></a>बैठक में निगम के प्रथम अप्रैल, 2011 से 29 फरवरी, 2012 तक के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। प्रो. धूमल ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि निगम ने 65.07 करोड़ रुपये का कारोबार कर पिछले वर्ष की तुलना में 5.57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।</p>
<p style="text-align: justify;">निदेशक मंडल ने सीधी भर्ती कोटे के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पदों को भरने की स्वीकृति भी प्रदान की।</p>
<p style="text-align: justify;">मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग और पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटक परिसर क्यारीघाट में अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सुविधा स्थापित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाए। यह एक वृहद पर्यटन गंतव्य परियोजना होगी जिसमें सम्मेलन कक्ष, पर्यटक मार्ट, पार्किंग और आवासीय सुविधाएं इत्यादि का प्रावधान होगा। इस परियोजना पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसे स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजा जाएगा।</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि मनाली और इसके आसपास के क्षेत्रों में स्काई बस की विशेष परियोजना भी बनाई गई है जो पर्यटन को प्रोत्साहन देने में सहायक होगी तथा इस क्षेत्र में आने वाले सैलानियोें को अनेक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकेंगी।</p>
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		<title>महिला एवं बाल विकास विभाग ने बंजार में लगाया महिला जागरूकता शिविर</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Mar 2012 12:03:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>एन. वी. ओ. न्यूज</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>

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		<description><![CDATA[कुल्लू: बंजार के एसडीएम वीरेंद्र शर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। महिलाओं को इन योजनाओं का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। बुधवार को बंजार में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित महिला जागरूकता शिविर में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">कुल्लू: बंजार के एसडीएम वीरेंद्र शर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। महिलाओं को इन योजनाओं का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। बुधवार को बंजार में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित महिला जागरूकता शिविर में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए एसडीएम ने कहा कि विभिन्न विभागों के माध्यम से चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों की जागरूकता भी बहुत जरूरी है। इसके लिए ग्रामसभा में भी आम लोगों की अधिक से अधिक भागेदारी होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/03/women-awareness-camp.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-18874" title="women-awareness-camp" src="http://nvonews.in/wp-content/uploads/2012/03/women-awareness-camp-300x204.jpg" alt="" width="300" height="204" /></a>उन्होंने कहा कि पहली अप्रैल को होने वाली ग्रामसभाओं की बैठकों में कई महत्वपूर्ण मुददों पर चर्चा होनी है। इसके साथ ही एक से चार अप्रैल तक विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा। इससे पहले एसडीएम व अन्य अधिकारियों का स्वागत करते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश शर्मा ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने माता शबरी महिला सशक्तिकरण योजना, किशोरियों के लिए सबला योजना, मदर टेरेसा मातृ संबल योजना और अन्य स्कीमों की विस्तार से जानकारी दी। खंड चिकित्सा अधिकारी डा. एम.एल. शासनी ने अटल स्वास्थ्य सेवा, जननी सुरक्षा योजना, मातृ सेवा योजना, मुख्यमंत्री विद्यार्थी स्वास्थ्य कार्यक्रम, मुस्कान योजना, स्वास्थ्य बीमा योजना और अन्य गतिविधियों के बारे में बताया। डा. शासनी ने बताया कि अटल स्वास्थ्य सेवा के तहत मुफत एंबुलैंस सेवा लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मुफत डिलीवरी का प्रावधान किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर प्रसव के समय मुफत आपरेशन व दवाईयों की व्यवस्था भी प्रदेश सरकार कर रही है। जच्चा-बच्चा की सही खुराक के लिए भी धनराशि दी जाती है।</p>
<p style="text-align: justify;">शिविर के दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और आंगनबाड़ी केंद्र होरनगाड़ के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य कीर्ति शौरी, तहसीलदार किरपा राम भारद्वाज, सीडीपीओ, आंगनबाड़ी कर्मचारी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।</p>
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		<title>वैश्विक आर्थिक मं‍दी के बावजूद बड़े पत्‍तनों पर पोत लदान में वृद्धि दर्ज की गई</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Mar 2012 11:59:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>संवाददाता</dc:creator>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[नई दिल्ली: वित्‍त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से फरवरी अवधि के दौरान भारत के 12 मुख्य पत्‍तनों पर पोत लदान 510.8 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के इसी अवधि के तुलना में 1.59 प्रतिशत ज्‍यादा रहा। इस वृद्धि को वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद प्राप्‍त किया जा सका है। इसकी जानकारी केन्‍द्रीय जहाज रानी मंत्री [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">नई दिल्ली: वित्‍त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से फरवरी अवधि के दौरान भारत के 12 मुख्य पत्‍तनों पर पोत लदान 510.8 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के इसी अवधि के तुलना में 1.59 प्रतिशत ज्‍यादा रहा। इस वृद्धि को वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद प्राप्‍त किया जा सका है। इसकी जानकारी केन्‍द्रीय जहाज रानी मंत्री श्री जी.के. वासन ने आज नई दिल्‍ली में अपने मंत्रालय की परामर्श समिति के बैठक के दौरान दी। श्री वासन ने कहा कि कुल वस्‍तुगत स्‍तर पर वित्‍त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से फरवरी के अवधि में यह कोयला, कंटेनर, अन्‍य लदान, उर्वरक, कच्‍चा उर्वरक पदार्थ और पीओएल लदान में क्रमश: 9.4 प्रतिशत, 6.7 प्रतिशत, 5.9 प्रतिशत, 1.9 प्रतिशत और 0.2 प्रतिशत रहा।</p>
<p>जहाज रानी मंत्री ने सदस्‍यों को बताया कि वित्‍त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से फरवरी अवधि में एन्‍नोर पत्‍तन ने लदान यातायात में सबसे ज्‍यादा रिकॉर्ड 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। कोचीन पत्‍तन दूसरे स्‍थान पर रहते हुए 13.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि तमिलनाडु के तुतीकोरीन स्थित वीओ चिदम्‍बरनार पत्‍तन ने 13.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। उन्‍होंने कहा कि मुख्‍य पत्‍तनों में कांडला पत्‍तन पर अधिकतम 75.4 मिलियन टन लदान हुआ, जो कुल बड़े पत्‍तनों पर किये गए लदान का 14.8 प्रतिशत है। इसके बाद विशाखापटनम 12.2 प्रतिशत एवं जेएनपीटी 11.8 प्रतिशत हिस्‍से के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्‍थान पर है।</p>
<p>श्री वासन ने बैठक में बताया कि भारत के विदेशी व्‍यापार का लगभग 95 प्रतिशत आकार में और 70 प्रतिशत मूल्‍य का परिवहन समुद्र के जरिए किया जाता है। उन्‍होंने बताया कि आकार में भारतीय पत्‍तनों पर किये गए कुल लदान का 75 प्रतिशत हिस्‍सा 12 बड़े पत्‍तनों से होता है। जहाज लदान यातायात विभिन्‍न पत्‍तनों पर मुख्‍य रूप से वैश्विक और घरेलू गतिविधियों में होने वाले स्‍तरों और बदलाव पर निर्भर करता है।</p>
<p>लोह अयस्‍क (मुख्‍य रूप से निर्यात) में पोत लदान यातायात वित्‍त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से फरवरी की अवधि में विशेष रूप से प्रभावित रहा और इसमें 28.6 प्रतिशत की गिरावट आई। मुख्‍य पत्‍तनों पर पोत लदान यातायात में शामिल कुल घटकों में सबसे ज्‍यादा वस्‍तुगत वस्‍तुएं शामिल रहीं (कुल लदान में प्रतिशत हिस्‍से के साथ)। इसमें पीओएल (32.0 प्रतिशत) उसके बाद कंटेनर यातायात (21.4 प्रतिशत) अन्‍य लदान (17.8 प्रतिशत) कोयला (14.0 प्रतिशत) लोह अयस्‍क (11.0 प्रतिशत) एवं उर्वरक तथा एफआरएम (3.8 प्रतिशत)। वैसे मुख्‍य पोत जिन्‍होंने वित्‍त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से फरवरी के महीने में जिन्‍होंने गिरावट दर्ज की है, उनमें मॉर्मुगाव (20.0 प्रतिशत) हल्दिया डॉक कॉम्‍प्‍लेक्‍स –एचडीसी (9.5 प्रतिशत) चेन्‍नई पत्‍तन (7.8 प्रतिशत), कोलकाता डॉक प्रणाली-केडीएस (3.8 प्रतिशत) तथा पारादीप (6 प्रतिशत)।</p>
<p>इस बैठक में भाग ले रहे संसद सदस्‍यों ने प्रमुख पत्‍तनों के रख-रखाव के लिए जहाज रानी मंत्रालयों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन पत्‍तनों की क्षमता बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिये। इन सुझावों में देश के विभिन्‍न पत्‍तनों पर वर्ग-।।। और IV के रिक्‍त पदों को तुरंत भरना शामिल है। एक सदस्‍य ने सलाह दी की विभिन्‍न पत्‍तनों को आवश्‍यक प्रदूषण नियंत्रक उपाय करना चाहिए। एक सदस्‍य ने अपना विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि अंतर्राष्‍ट्रीय जलीय परिवेश में भारतीय जहाजों पर कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इस बैठक में उपयुक्‍त आपदा प्रबंधन नीति का भी सुझाव था। नौवहन क्षेत्र के विकास के लिए सदस्‍यों के महत्‍वपूर्ण सुझाव पर उन्‍हें धन्‍यवाद देते हुए श्री वासन ने कहा कि उनके सुझाव जहाजरानी मंत्रालय को विभिन्‍न पत्‍तनों पर लदान क्षमता को बढ़ाने में मार्ग दर्शन का काम करेंगे।</p>
<p>इस बैठक में लोकसभा के सदस्‍यों में श्री फ्रांसिस्‍को कॉस्‍मी सरडिन्‍हा, श्री अनिरूधन सम्‍पथ, श्रीमती पूनमबेन वेल्‍जीभाई जाट, श्री नलीन कुमार कटील एवं श्री जे.एम. एरोन रशीद शामिल थे।</p>
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		<title>समाज कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: सरवीन चौधरी</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Mar 2012 11:55:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>एन. वी. ओ. न्यूज</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>

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		<description><![CDATA[शिमला: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्रीमती सरवीन चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार सामाजिक कल्याण क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। प्रदेश सरकार ने समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए अनेक प्रभावी पग उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पैंशन योजना के अन्तर्गत वृद्धावस्था, विधवा, अपंगता [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">शिमला: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्रीमती सरवीन चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार सामाजिक कल्याण क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। प्रदेश सरकार ने समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए अनेक प्रभावी पग उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पैंशन योजना के अन्तर्गत वृद्धावस्था, विधवा, अपंगता पैंशन को 330 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिमाह किया है।<br />
श्रीमती सरवीन चौधरी ने सामाजिक सुरक्षा पैंशन को बढ़ाकर 400 रुपये करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनवरी 2008 में सत्ता संभालने के बाद वर्तमान सरकार ने इसे 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये किया था। इस के पश्चात इसमें पुनः वृद्धि कर इसे 300 रुपये से 330 रुपये किया गया। अब यह राशि बढ़ाकर 400 रुपये की गई है। इसके अलावा 80 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को सामाजिक सुरक्षा पैंशन की राशि बढ़ाकर 600 रुपये की गई है। इन बढ़ी हुई दरों का भुगतान अप्रैल, 2012 से किया जाएगा।<br />
उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश में 2 लाख 77 हजार 817 पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पैंशन प्रदान की जा रही है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 94 हजार 716 नये पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पैंशन के अधीन लाया गया।</p>
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