कोख बनी कवच:300 पॉजिटिव मांओं ने कोख में बच्चों को कोरोना से बचाया, अंबेडकर अस्पताल में मई से अब तक संक्रमित महिलाओं की डिलीवरी के बाद सभी शिशु निगेटिव


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रायपुरएक घंटा पहले

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दैनिक भास्कर ने जुटाई उस स्टाफ की तस्वीर, जिन्होंने अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी कराई।

(पीलूराम साहू) प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल से एक खुशखबर है- अंबेडकर अस्पताल में मई से अब तक 300 काेराेना संक्रमित महिलाओं की डिलीवरी हुई, सभी शिशु निगेटिव हैं। अस्पताल में 160 सिजेरियन हुए और बाकी डिलीवरी नाॅर्मल हुईं। बाकी गर्भवती महिलाएं अन्य समस्याओं के इलाज के लिए भर्ती हुई थीं, सभीं इलाज करा डिस्चार्ज हो चुकी हैं। बड़ी बात ये है कि मेडिकल स्टाफ भी संक्रमित नहीं हुआ।

शुक्रवार देर रात से शनिवार सुबह तक संक्रमित महिलाओं ने 3 बच्चों को जन्म दिया और इन तीनों का कोरोना टेस्ट भी निगेटिव रहा। डॉक्टरों का दावा है कि संभवतः सेंट्रल इंडिया में कोरोना संक्रमित महिलाओं की सबसे ज्यादा डिलीवरी यहीं हुई और सभी शिशु निगेटिव निकले। सितंबर माह में ही कोरोना व नॉन कोविड को मिलाकर अंबेडकर व जिला अस्पताल पंडरी में 1000 डिलीवरी हुईं। प्रतिदिन यहां भर्ती होने वाले नए मरीजों की संख्या 50 तक होती है।

अंबेडकर को मई में कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किया गया। तब तत्कालीन एचओडी व वर्तमान में सिम्स की डीन डॉ. तृप्ति नागरिया के नेतृत्व में गायनिक विभाग पंडरी स्थित जिला अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। विभाग में एचओडी डॉ. ज्योति जायसवाल के अलावा डॉ. रूचि किशोर, डॉ. अविनाशी कुजूर, डॉ. आभा डहरवाल, डॉ. किरण अग्रवाल, डॉ. स्मृति नाइक, डॉ. अंचला महिलांग, डॉ. नेहा ठाकुर, डॉ. सुमा एक्का, डॉ. अंजुम खान, डॉ. श्वेता ध्रुव, डॉ. नीलम सिंह, डॉ. माधुरी ठाकुर एवं डॉ. मीनू केशकर सेवा दे रही हैं।

सुरक्षित डिलीवरी कराई जा रही

नेहरू मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विष्णु दत्त ने कहा कि कोरोनाग्रस्त महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी कराई जा रही है। ऑब्स एंड गायनिक की टीम तन्मयता से लगी हुई है।

डिलीवरी के समय अस्पताल में साथ सिर्फ 6 साल की बेटी थी

रीवा मप्र की सीमा मिश्रा बताती हैं 27 अगस्त की दरम्यानी रात तेज बारिश के बीच प्रसव पीड़ा हुई। घर में उस वक्त मेरी 6 वर्षीय बेटी के अलावा कोई और नहीं था। मैंने 112 पर फोन किया। कुछ देर बाद 112 की टीम हमें लेने आ गई। बेहद सुरक्षित ढंग से उस तेज बारिश की रात में 112 की टीम मुझे जिला अस्पताल पंडरी ले गई। वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर डिलीवरी कराई, वहां उनकी मदद से मैंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद मेरे बेटे को टीका भी लगाया गया।



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